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जब प्रभु कहते हैं – अब इस जीव का कल्याण निश्चित है

ब्रह्मचर्य

ब्रह्मचर्य भगवान प्राप्ति का मुख्य साधन है।

कर्तव्य

नैतिक और सामाजिक दायित्वों का ईमानदारी से पालन करना ही कर्तव्य है।

अध्यात्म

आत्मा, परमात्मा, आंतरिक सत्य को जानना और उनसे जुड़ना।

परिवार

एक-दूसरे से प्रेम, सहयोग और समर्थन से बंधे लोगों का समूह।

एकांतिक वार्तालाप

1

भगवान पर भरोसा रखें

जब अपमान असहनीय लगे, तब भगवान के सामने रोकर कहें –
“हे प्रभु, हम असमर्थ हैं। आप समर्थ हैं, आप ही संभाल लीजिए।”
यह प्रार्थना हृदय को हल्का करती है और आस्था को मजबूत। भगवान जब न्याय करते हैं तो उसका परिणाम अत्यंत गहरा और स्थायी होता है।

2

अच्छे कर्म ही देते हैं सच्चा सुख

यदि कोई हमारे साथ बुरा करता है तो हमें उसके साथ भी बुरा नहीं करना चाहिए। अपमान का उत्तर अच्छाई से देने पर हमें जीवन में सुख मिलता है।
बुरे कर्म का बुरा फल और अच्छे कर्म का अच्छा फल – यही सृष्टि का शाश्वत नियम है।

3

हिंसा और क्रोध से बचें

लड़ाई-झगड़ा, गाली-गलौज और मारपीट केवल दुख और बंधन लाते हैं। कानून भी ऐसे आचरण को अपराध मानता है। इसलिए हमें न क्रोध करना चाहिए, न हिंसा।
शांति और सहनशीलता ही हमें सच्चा सुख देती है।

क्या इस कलियुग में भी भगवान की प्राप्ति संभव है?

यह सोचना गलत है कि भगवान केवल किसी विशेष युग में ही मिलते हैं। भगवान तो हर युग में हैं। यदि भगवान हैं, तो हमें प्राप्त क्यों नहीं हो सकते? क्या यह पूरा जीवन यूँ ही मज़ाक में व्यतीत हो जाएगा? क्या काम, क्रोध जैसे शत्रुओं पर मज़ाक से विजय पाई जा सकती है? क्या हृदय में आनंद के बिना विषयों पर विजय प्राप्त की जा सकती है? नहीं।

हमारा पूरा जीवन माता-पिता, पत्नी, पुत्र, परिवार के इस जाल में फंसा रहता है। लेकिन क्या जीवन ऐसे ही अकेले व्यतीत हो जाएगा? नहीं, भगवत प्राप्ति के लिए वह नेत्र, वह भाव, वह विरह, वह जलन, वह भूख चाहिए, जिसमें भगवान मिलें।

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अपमान सहन करने की शक्ति और भगवान पर विश्वास

अपमान पर चुप रहना क्यों बेहतर है?

जब कोई हमें अपमानित करता है तो हमारी पहली प्रतिक्रिया गुस्सा होती है। यदि हम उसी समय क्रोध में आकर जवाब दे देते हैं तो बात और बढ़ जाती है। अपमान का उत्तर हिंसा, झगड़े या कड़वे शब्दों से देने पर हम भी अपराधी बन जाते हैं।
सहन करना कठिन है, लेकिन यही सही मार्ग है।

कर्म और फल का अटूट नियम

इस संसार का नियम है – जैसा कर्म, वैसा फल।
यदि कोई हमें गाली देता है और हम भी गाली देते हैं तो हम दोनों ही अपराधी हो जाते हैं। परंतु यदि हम चुप रहकर सहन करते हैं तो वह व्यक्ति अपने कर्मों का फल अवश्य भोगेगा। देर हो सकती है, लेकिन अन्याय कभी अनदेखा नहीं होता।

अपमान सहना ही सच्ची शक्ति

सहन करना कमजोरी नहीं बल्कि बड़ी ताकत है। जो इंसान अपमान झेल लेता है, वही वास्तव में मजबूत होता है।
यदि कोई गाली दे और हम शांत रहकर वहां से चले जाएं तो यह हमारी शक्ति और धैर्य का परिचायक है। समय आने पर अपमान करने वाले को ऐसा दंड मिलेगा कि वह दोबारा वैसा कार्य करने से डरेगा।

प्रेरणादायक एवं मार्गदर्शक: Prem-anand.in

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